लानत है हिन्दुओं तुम पर ,डूब मरो चुल्लू भर पानी में -सत्यमित्र

लानत है हिन्दुओं तुम पर ,डूब मरो चुल्लू भर पानी में!

गंगा गौ और गायत्री की दुहाई देने वाले पाखंडी और लालची हिन्दू ,स्वयं मुसलमान कसाई के हाथ अपनी वोह गो माता बेच देते है जो अब दूध नहीं देती/ अपना प्यारा बैल बेच देते है,जिसको हम खेत की जुताई के समय सहलाते ,प्यार करते व् थपथपाते हैं /वह अच्छी तरह जानते है कि जिस को हम अपनी वोह प्यारी गो माता बेच रहे हैं वह इसे बड़ी बेदर्दी से ट्रक पर लाद कर ले जायेगा और इस्लामी रीति रिवाज़ से  तड़पा तड़पा कर इसको हलाल करेगा/मुझे अपनी नौकरी के दौरान कितनी बार गाँव के पशु बाज़ारों में जाने का अवसर मिला और मेने बड़ी बारीकी से इस का अध्यन किया की वोह भोला भाला गाँव का किसान कितना मक्कार और लालची हो चुका है/अक्सर हमारी यह धारणा है कि गाँव के लोग अत्यधिक सरल ,भोले भाले और  धर्मभीरु होते हैं लेकिन मेरे यह सारे भ्रम अपनी इस चार वर्ष के गाँव के प्रवास में टूट गए /इस देश की अभी भी बहुसंख्यक आबादी हिन्दू है और उसी अनुपात में किसान भी हिन्दू है/मुसलमान पर दोष देने से गो हत्या बंद नहीं हो जाएगी /मुसलमान तो गाय काटेगा ही और खायेगा भी और अब तो उसने हिन्दुओं को भी गों मांस खिलाना चालू कर  दिया है,और हिन्दू खा रहा है /मैं  उन तथाकथित भोले भाले ग्रामवासिओं से काफी वाद विवाद भी किया करता था की अपनी गायों को इन  कसाइयों के हाथ मत बेचो/कितनी कातर दृष्टि से यह अपने पालनहार को देख रही है/इसने आपको,आपके बच्चों को कितने वर्षों तक दूध पिलाया है,लेकिन वोह लालची गाँव का किसान चंद रुपयों के लिए उस कसाई के हाथ अपनी “गौ माता “बेच देता है/यही ही कारण है कि आज कान्हा का देश संसार में गों मांस का सब से बड़ा निर्यातक है/कहाँ है हिन्दुओं की दया भावना,धर्म कर्म ,पूजा पाठ,यह तीर्थ यात्राए और दान पुण्य /सब का सब पाखण्ड है/कोई नैतिकता ही नहीं बची,केवल धन की लालसा ,भौतिकता और झूटी बाते!

गाय :मेरी माँ

मैं छोटा सा था,तभी से मेरे पिताजी ने मेरे लिए एक गाय पाल रखी थी/  मेरी माँ की मृत्यु हो चुकी थी/मेरी नयी माँ (गाय)मुझ से उतना ही प्रेम करती थी,जितना की मेरी असली स्वर्गवासी माँ/वह दूध देती थी,में पी लेता था/जब कभी उसके पास बैठता,वह प्रेम से मेरे हाथ.पैर ,कमर और सर को चाटती थी/में उसको पुचकारा करता था/वह बड़ी प्रेम भरी निगाह से मुंह उठा कर मेरी तरफ देखा करती थी/
एक बार मोहल्ले का एक कुत्ता पागल हो गया,में अपनी माँ के साथ धुप खा रहा था/इतने में शोर मचा-बचो!पागल कुत्ता आया है,में घबरा गया,डर गया और रोने लगा/कुत्ता मेरी तरफ झपटा ,परन्तु मेरी गाय माँ ने मुझे बचा लिया/अपने सींगो से उसने पागल कुत्ते को अधमरा कर दिया और फिर आकर मुझे चाटने लगी /उसदिन गाय के अंदर मैंने माँ का दिल और रूप देखा/इस घटना के पांच साल बाद मेरी माँ बीमार पड़ गयी /न मालूम क्या हो गया उसे ?मैंने बहुत दोड़ धूप की,मगर कुछ न हो सका/परन्तु अंतिम सांस में भी वह मेरी गोद में सिर रखे ,प्रेम भरी दृष्टि से मुझे देखती हुई ,अंतिम बार मेरे  सिर और मुख को चाट कर चल बसी/
उसी दिन से मुझे गाय के   ममता मय होने का विश्वास हो गया/में जहाँ भी जाता हूँ,वहां हिन्दू मुसलमान दोनों को गो -प्रेम का पाठ पढाता हूँ/

-एक मुसलमान फकीर   

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