इस्लाम,कुरान और मुसलमानों को पहचानों !!!महर्षि दयानन्द सरस्वती एवं समर्थ गुरू राम दास जी का इस्लाम के विषय में मत !

 महर्षि दयानन्द सरस्वती (सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१)

“हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता। हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए। इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए। हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें। हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है”

समर्थ गुरू राम दास जी (डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८)

मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं। और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है। इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए उनका वध किया लूटा व उन्हें गुलाम बनाया।

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