गाय :मेरी माँ

गाय :मेरी माँ

मैं छोटा सा था,तभी से मेरे पिताजी ने मेरे लिए एक गाय पाल रखी थी/  मेरी माँ की मृत्यु हो चुकी थी/मेरी नयी माँ (गाय)मुझ से उतना ही प्रेम करती थी,जितना की मेरी असली स्वर्गवासी माँ/वह दूध देती थी,में पी लेता था/जब कभी उसके पास बैठता,वह प्रेम से मेरे हाथ.पैर ,कमर और सर को चाटती थी/में उसको पुचकारा करता था/वह बड़ी प्रेम भरी निगाह से मुंह उठा कर मेरी तरफ देखा करती थी/
एक बार मोहल्ले का एक कुत्ता पागल हो गया,में अपनी माँ के साथ धुप खा रहा था/इतने में शोर मचा-बचो!पागल कुत्ता आया है,में घबरा गया,डर गया और रोने लगा/कुत्ता मेरी तरफ झपटा ,परन्तु मेरी गाय माँ ने मुझे बचा लिया/अपने सींगो से उसने पागल कुत्ते को अधमरा कर दिया और फिर आकर मुझे चाटने लगी /उसदिन गाय के अंदर मैंने माँ का दिल और रूप देखा/इस घटना के पांच साल बाद मेरी माँ बीमार पड़ गयी /न मालूम क्या हो गया उसे ?मैंने बहुत दोड़ धूप की,मगर कुछ न हो सका/परन्तु अंतिम सांस में भी वह मेरी गोद में सिर रखे ,प्रेम भरी दृष्टि से मुझे देखती हुई ,अंतिम बार मेरे  सिर और मुख को चाट कर चल बसी/
उसी दिन से मुझे गाय के   ममता मय होने का विश्वास हो गया/में जहाँ भी जाता हूँ,वहां हिन्दू मुसलमान दोनों को गो -प्रेम का पाठ पढाता हूँ/

-एक मुसलमान फकीर   

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