‘लव जिहाद’की दाहकता बतानेवाली एक उच्च विद्याविभूषित युवतीका आत्मकथन !

 ‘मैं मानसशास्त्र विषयमें पदव्युत्तर (एम्.ए.) शिक्षा लेनेके उपरांत एक निजी प्रतिष्ठानमें नौकरी करती थी । वहां नौकरी करनेवाला एक मुसलमान युवक मुझे अपने प्रेमजालमें फांसनेका प्रयत्न करता था । एक दिन उस मुसलमानने मुझे अपने घर बुलाया । वहांसे लौटते समय मेरा रूमाल उसके घरपर छूट गया । कुछ दिन पश्चात् मेरे घर आए एक ज्योतिषीने कहा, ‘उस रूमालपर मुसलमानने जादू-टोना किया है ।’ एक बार दिल्ली और आंध्रप्रदेश जाकर मुंबई लौटनेपर उस मुसलमानने मुझे एक सोनेका हार और लोलक (लॉकेट) उपहारमें दिया । मुझे भी वह लेनेकी दुर्बुद्धि हो गई । उसने मेरे सामने विवाहका प्रस्ताव रखा । मैंने तुरंत उसका स्वर्णालंकार लौटाकर विवाह करना अस्वीकार कर दिया ।

एक दिन उसने मुझे आग्रहपूर्वक एक टैक्सीमें बिठाया और एक स्थानपर ले गया । वहां उसने दाढी बनानेकी पत्तीसे (ब्लेडसे) अपनी कलाईकी नस काटकर पुनः विवाहका प्रस्ताव रखा । रक्त देखकर मैं डर गई और रोने लगी । उसने मुझे कहा, ‘मुझसे प्रेम करती हो, इसलिए तुम्हें रोना आ रहा है ।’ वह सतत एक माहतक मेरे पीछे पडकर भयादोहनके (इमोशनल ब्लैकमेलके) द्वारा प्रेमकी याचना करता रहा । एक दिन वह मुझे भगाकर ले गया और बलपूर्वक विवाह किया । मेरी मांको यह पता चलनेपर उसे गंभीर आघात पहुंचा और मस्तिष्कमें विकार (ब्रेन हैमरेज) होकर उसकी मृत्यु हो गई । उस समय मुझे बहुत पश्चाताप हुआ । किंतु अब पश्चाताप करनेसे कोई लाभ नहीं था । विवाहके पश्चात् तो मुझपर यातनाओंकी शृंखला ही आरंभ हो गई । इस बीच मुझे एक बेटा भी हुआ । मुझपर और मेरे बच्चेपर जो अत्याचार हुए, उसका वर्णन शब्दोंमें करना असंभव है । मुझे भद्दी गालियां दी जाना, दिनचर्याका अभिन्न अंग था । उसने मेरी मांके वर्षश्राद्धपर भी मुझे नहीं जाने दिया तथा मेरी बहनों और अन्य संबंधियोंसे संपर्वâ तोडनेके लिए बाध्य किया । उस मुसलमानका घर ‘छोटे पाकिस्तान’समान मुसलमानबहुल क्षेत्रमें था । इसलिए मैं इन अत्याचारोंके विषयमें किसीसे कुछ कह भी नहीं पाती थी । निरंतर ८ वर्षोंतक मैं यह अत्याचार सहती रही । कदाचित् उसमें भी जादू-टोना रहा हो । मध्यकी अवधिमें उसने अन्य महिलाओं से शारीरिक संबंध रखा, तब मैंने उसके विरोधमें पुलिस थानेमें परिवाद (शिकायत) लिखवाया । इसलिए उसने मुझे घरसे निकालकर अगले ही माह दूसरा विवाह कर लिया । तत्पश्चात् ‘विश्व हिंदु परिषद’की सहायतासे मैंने पुनः हिंदु धर्ममें प्रवेश किया । मेरी समस्त हिंदु युवतियोंसे एक ही विनती है कि वे मेरी भांति भूल न करें !’ – ‘लव जिहाद’की बलि चढी एक हिंदु युवती, मुंबई.

 http://hindisanatanprabhat.blogspot.in/2012/01/blog-post_30.html


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2 Responses to ‘लव जिहाद’की दाहकता बतानेवाली एक उच्च विद्याविभूषित युवतीका आत्मकथन !

  1. A.L.RAWAL,MUMBAI says:

    THIS IS IMPERIALISM IN ITS WORST FORM. WE HAVE TO BE CAREFUL OF THE PEOPLE WHO BHAVE IN SUCH A WAY. THIS IS A COMMON OCCURENCE.WITH HINDU, CHRISTIAN AND OTHER NON-MUSLIM WOMEN.

  2. A.L.RAWAL,MUMBAI says:

    IT IS TRUE OF INTELLECTUAL WOMEN ESPECIALLY. THEY HAVE A BROAD-MINDED APPROACH AND THEN LAND THEMSELVES IN THE LAP OF NARROW MINDED MULLAS. THEY USE THEM AS SEX-SLAVES AND THEN USE THEM AS INTELLECTUAL SLAVES.

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