हिन्दुओं का अतुलनीय आत्मघाती अंधविश्वास और पाखंड -सत्यमित्र

यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम्

गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भूत प्रेत, मूर्दा (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र अथवा समाधि) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत-प्रेत ही बनते हैं.

देश में जितने भी मजार हैं इनमे में एक  भी ऐसा नहीं है  जो किसी देश भक्त ,इश्वर भक्त,योगी,लेखक या समाजसेवक का हो.यह मजारे उनलोगों की हैं जिन्होंने मुगलकाल युद्ध में या धोखे से हिन्दुओं को मारा है.जो मजारे सूफी संतों या फकीरों की बतायी जाती हैं,वह भी सूफी संतों के वेश में मुगलों के जासूस होते थे.वह सूफी संत बन कर हिन्दुओं के मंदिरों में जाते थे वहां जासूसी कर के सारी गुप्त सूचनाएं मुसलमान बादशाहों के भेज देते थे,वह सीधे हिन्दुओं पर हमला करने वालों से भी ज्यादा खतरनाक होते थे.उन पापिओं की मजारों पर हिन्दू पचास पचास हज़ार रूपये की चादर चड़ाते है .हर ब्रहस्पतिवार को मजारो पर मेला सा लगता है,लाखों का चडावा  एक एक मज़ार पर चड़ताहैं.हिन्दू जो चडावा चड़ाते हैं उसी धन से हिन्दुओं को मारने के लिए हथियार ख़रीदे जाते हैं.अनेक बार मजारों पर देखा है की मजारो पर अधिकतर हिन्दू स्त्री पुरुष  ही जाते हैं,जिनके मज़ार होते हैं वह नहीं पूजते.हिन्दुओं के तेतीस करोड़ देवता कहे जाते है,परन्तु हिन्दुओं का पेट तेतीस करोड़ देवताओं से भी नहीं भरा ,वह भी कम पड़  गए तब मुसलमानों के मजारों पर जाते हैं.ज़िंदा मुसलमान तो हिन्दुओं को खाने को तैयार बैठा है और मरे हुए मुसलमानों से हिन्दू अपनी कामनाये पूरी करवा रहा है. यह हिन्दू कौम भी संसार का आठवां महान आश्चर्य है.

भारत में हज़ारों मज़ार ऐसे हैं जिनमें  वोह घोर पापी  हिन्दू हन्ता दबे  पड़े है जो  हिन्दू स्त्रीओं के बलात्कारी,गोहत्या करने वाले,हज़ारों हिन्दू मंदिरों को तोड़ने वाले,हज़ारों गाँवों को लूटने वाले,जलाने वाले और हिन्दुओं को मुसलमानों का गुलाम बनाने का काम किया.बहुत अफ़सोस की बात है हिन्दू अंधविश्वास की जकड में अभी भी फसा हुआ है और उन्ही को पूज रहा है.सन २००० में काठमांडू से दिल्ली जाने  वाले विमान का अपहरण आंतक वादिओं  ने कर लिया और विमान को कंधार ले गए.पश्चात में क्या हुआ इसका वर्णन हम नहीं करना चाहते,परन्तु एक पत्रकार ने एक घटना का जो ज़िक्र किया है,उससे विचलित हुए बिना नहीं रहा गया.अफगानिस्तान जा कर पत्रकारों ने विमान के यात्रियों से मुलाकात की,वहां के कुछ पत्रकार भी आये,दोनों देशों के पत्रकारों की मुलाक़ात भी हुयी .भारतीय पत्रकारों ने अफगानिस्तानी पत्रकारों से कहा की आप हमें अपने देश की कोई विशेष चीज़ हमें दिखाएँ जिसकी चर्चा हम अपने देश में जाकर कर सके स्थानीय पत्रकार उन्हें  सड़क किनारे पर स्थित एक कब्र पर ले गए,उस कब्र पर एक जूता रखा हुआ था.भारतीय पत्रकारों ने पूछा कब्र पर जूता क्यों रखा है.अफगानी पत्रकारों ने कहा की यही तो देखने वाली चीज़ है भारतीय पत्रकार बहुत उत्सुक थे पूछा यह क्या मामला है हमें बताये.स्थानीय पत्रकारों ने कहा बस दो मिनट रुकिए,तभी एक कार आकर रुकी,उसमे से कुछ व्यक्ति उतर कर आये और सब ने कब्र पर पांच पांच जूते लगाये..भारतीयों ने पूछा यह क्यों होता है तो उतर मिला अभी और देखो,तभी एक और कार आ कर रुकी और उसमे सवार  सभी लोगो ने कब्र पर जूते लगाये.वह कब्र सड़क किनारे थी,आते जाते लोग उसमे जूते मारने को पुण्य का काम  मानते थे.

भारतीयों ने पूछा अब आपको बताना ही पड़ेगा की यह कब्र किसकी है और इस पर जूते क्यों मारे जाते हैं.अफगानी पत्रकारों ने इस का उतर देते हुए कहा की ये कब्र तुम्हारे पृथ्वीराज चौहान की है और उसने धोखे से अपने शब्दभेदी बाण से हमारे बादशाह मुहम्मद गोरी को मार दिया था.इसी का बदला लेने के लिए पृथ्वीराज चौहान की कब्र पर हर मुसलमान जूतेमारता है.कुछ लोग गोरी को मारने की घटना को काल्पनिक कहते हैं .चलो हम मान लेते हैं  की भारत के लोगों ने कल्पना कर ली होगी,पर अफगानिस्तान के मुसलमानों ने भी कल्पना कर ली क्या?अफगानिस्तान की कब्र वाली घटना से साफ़ हो जाता है की वहां यह घटना जरूर  घटी होगी.यह घटना वहां से आकर पत्रकारों ने २० जून २००० के दैनिक जागरण में छापी.

अब आप लोग हिन्दुओं की गिरावट का अनुमान लगा सकते है की हिन्दू कितना गिर चुका है.एक तरफ तो मुसलमान कब्र बना कर जूते मारते हैं और दूसरी तरफ यह बेवकूफ अन्धविश्वास में डूबा हुआ हिन्दू मुसलमानों की कब्र पर फूल और चादरे चडाता फिर रहा है.सचाई यह है की गोकशी ,हिन्दू स्त्रीओं की लाज लूटने  तथा भारत को दारुल इस्लाम बनाने का सपना देखने वाले,नीच से नीच साजिश करने वाले क्या मरने के बाद हिन्दुओं का भला चाहेगा.कब्र में दफ़न करने के बाद  जिसमे मांस और हड्डियों को कीड़े खा कर मिटटी बना चुके हो,जिस की आत्मा कभी की जा चुकी हो,वोह सड़ी हुई मिटटी इन हिन्दुओं का कौन सा भला करेगी.

खोज करने पर कई नयी बाते सामने  आयी है की इन मजारों में कई मजारे तो कुते बिल्लिओं की है.जिसको उस समय के अमी मुसलमानों ने पाल रखा था.यह गौर करने वाली बात है की सड़क किनारे बनी यह मजारे कोई साधरण बात नहीं है,इसके पीछे एक निर्धारित योजना और बहुत बड़ी साजिश है.धीरे धीरे इन की संख्या बढती जा रही हैं. और देश के मुख्य मुख्य राजमार्गों पर दिखाई देने लग पड़ी है.इन के कारण मुसलमानों के हिन्दुओं के साथ फसाद भी होने लग पड़े हैं.

वास्तव में होता क्या है की कही सड़क किनारे पहले तो एक कच्ची कब्र दिखाई देगी,फिर कुछ दिन बाद उसका पक्का चबूतरा दिखाई देगा और उसके पास एक मटका दिखाई देगा.धीरे धीरे वहां एक दाड़ी वाला मुल्ला झोपडी बना कर बैठा मिलेगा ,फिर वहां एक मस्जिद दिखाई देगी.वह मुल्ला वहां आने जाने वालों को अपने पास बैठा कर झूटी कहानिया सुनाएगा.जैसे पीरबाबा ने एक बाँझ स्त्री को पुत्र दिया ,पीरबाबा ने एक आदमी की दस साल पुरानी बिमारी ठीक कर दी,एक की मुकदमे में जीत हो गयी,एक आदमी के बेटे की नौकरी पीरबाबा की कृपा से लग गयी.एक युवक का विवाह पीरबाबा की कृपा से हो गया.इन बातों को सुनकर बहुत से मूर्ख अन्धविश्वासी और स्वार्थी लोग इनके जाल में फस जाते हैं.इसकी  सब से ज्वलंत मिसाल प्रसिद्ध संगीतकार ए आर  रहमान है जो इन के चक्कर में पड़ कर हिन्दू  दिलीप शेखर से मुसलमान होगया.बहुत अफ़सोस की बात है की हिन्दुओं के कई जाने माने नाम इन मुसलमान मजारों के चक्कर लगाते रहते है.अभी फिल्म इंडस्ट्री के बिग बी ,अजयदेवगन ,प्रियंका चोपड़ा ,रणवीर कपूर सहित दर्जनों ऐसे कलाकार है जो बेवकूफी,अन्धविश्वास की जीती जागती मिसाल है.जो अजमेर में दरगाह पर चादर चडाने गए.इन  की .इन मुसलमान पीरों ,सुफिओं और दरगाह वालों का प्रचार  का तरीका  बहुत आसान होता है,बस अफवाहें   फैलाओ /

२१ वी शताब्दी के प्रगतिशील ,शिक्षित हिन्दुओं का यह व्यवहार और मानसिकता आत्मघाती है.साँपों को दूध मत पिलाओ,अपनी कब्र अपने हाथों मत बनाओ,अपने मरने के लिए इन मजारों पर चादर चड़ा कर अपने ही कफ़न को मत जोड़ो.     

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One Response to हिन्दुओं का अतुलनीय आत्मघाती अंधविश्वास और पाखंड -सत्यमित्र

  1. यह मूर्ख हिन्दू न जाने कब जागेगा |

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