इतिहास के पन्नों से,गाँधी की करतूतों का कच्चा चिठ्ठा -A GLIMPSE OF GANDHI’S CUNNINGNESS-BY SATYAMITRA

नेहरु को प्रधानमंत्री बनाने में इस देश की जनता का कोई  कसूर नहीं था,देश की जनता नेहरुको प्रधानमन्त्री नहीं बनाना चाहती थी /यह सारी करतूत गाँधी की थी/जिस समय अंग्रेज भारत छोड़ कर जाने को तैयार हुए तो उन्होंने कहा की हम  देश छोड़ रहे है ,आप अपना प्रधानमन्त्री चुन लो/उस समय कांग्रेस की कर्यसिमिति की मीटिंग की गयी थी और यह बात रखी कि देश का प्रधानमंत्री किसे बनाया जाये

उस समय सब की सलाह से यह तय हुआ कि प्रधानमंत्री का चुनाव न करके कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया जाये और जो राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाये उसी को देश का प्रधानमंत्री बनाया जाये/देश के प्रान्तों के कांग्रेस अध्यक्ष मतदान करेगें /जब यह मतदान हुआ तो उसमे 15कांग्रेस प्रांतीय अध्यक्षों ने मतदान किया/उन 15मतों में 13 मत सरदार पटेल को मिले थे और केवल दो मत नेहरु को/नेहरु और सरदार पटेल दो ही प्रत्याशी थे/

इससे स्पष्ट है की देश की जनता नेहरु को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं चाहती थी/जब कुटिल नेहरु को यह बात समझ में आगई कि वोटो के आधार पर तू प्रधानमंत्री नहीं बनने वाला तो उसने गांधी को कहा की अगर में प्रधानमंत्री नहीं बनता तो में चैन से नहीं बैठने वाला/या तो मुझे प्रधानमंत्री बनाओ नहीं तो में कांग्रेस के दो टुकड़े कर दूंगा/जब दो टुकड़े होंगे तो अँगरेज़ कहेगे कि हम सत्ता किस को दे?तुम्हारे तो दो भाग हो चुके हैं/इस प्रकार सारी मेहनत बेकार हो जाएगी/तब गाँधी ने सरदार पटेल को पत्र लिखा और उसमे कहा,प्रिय भाई सरदार पटेल आप सदेव  ही मेरा सम्मान करते रहे है,आप ने हमेशा मेरी प्रत्येक बात सम्मान दिया है,मुझे आशा है पहले  की तरह आज भी मेरी बात नहीं टालेंगे/आप तो त्यागी तपस्वी व्यक्ति है ,आप बड़े से बड़ा त्याग कर सकते है/देश की जनता आप को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है परन्तु नेहरु प्रधानमंत्री बनने के लिए बड़ा लालायित है इसलिए आप अपना नाम वापस लेलो और नेहरु को प्रधानमंत्री बन जाने दो/सरदार पटेल गांधी की कुटिल चाल में आगये/क्योकि सरदार पटेल एक ईमानदार,नेतिकता से भरपूर वीर पुरुष थे लेकिन भोले भी थे,उन्होंने उसी समय गाँधी को उत्तर दिया  कि में अपना नाम वापिस लेता हूँ,आप नेहरु को ही प्रधानमंत्री बना लीजिये/इस प्रकार नेहरु के प्रधानमंत्री बनने के दो ही कारण थे एक तो गांधी की धूर्तता और दुसरा सरदार पटेल का भोलापन/  

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One Response to इतिहास के पन्नों से,गाँधी की करतूतों का कच्चा चिठ्ठा -A GLIMPSE OF GANDHI’S CUNNINGNESS-BY SATYAMITRA

  1. Manav says:

    Both of them are destroyers of the nation, they went but left us suffering at the hands of congress till date.

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