Monthly Archives: June 2010

जीने की राह(भाग-4)बच के कहाँ जाओगे ,जैसा करोगे,वैसा भरोगे -लेखक सत्यमित्र

प्रकृति  अनंतकाल से ही सृष्टि को नियमबद्ध रूप से चला रही है,उसकी गति अनिरुद्ध व् अविरल है/वास्तव में निरंतर  गति ही जीवन का मूलाधार है/उपनिषदों  में भी” चरेवैती,चरेवैती “ का उपदेश दिया गया है/प्रकृति की विशाल कार्यशाला में सभी कार्यरत हैं/कर्मचक्र कभी थमता ही … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment