Monthly Archives: May 2010

ARE HINDUS GETTING MORE INTOLERANT AND AGGRESSIVE?-By Satyamitra

जब रंज दिया बुतों ने तो खुदा याद आया (When hurt by idols, then remembered God) Few weeks ago, in a Talk show by one of the anti-Hindu, biased English TV channel(almost all English TV channels are anti-Hindu and pro-Muslims),the … Continue reading

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जीने की राह(भाग-३)सृष्टि की उत्पति एवं ईश्वर -लेखक सत्यमित्र

इस ब्रह्मांड में जीवन कब , क्यों और कैसे  प्रारम्भ  हुआ?अनंतकाल से यह  प्रश्न सदा अनुतरित रहा है तथा सम्भवता भविष्य में भी इसका उत्तर कोई नही दे सकेगा/ सब कुछ अनुमान पर आधारित है तथा आने वाले समय में अनुमान ही लगाये जाते रहेंगे /कोई अंदाजा भी लगाये तो क्या लगाये /प्रश्न लाखों,करोड़ों बल्कि अरबों वर्षों का है/वैज्ञानिक,दार्शनिक,विचारिक,बड़े बड़े योगी तपस्वी तथा तत्वज्ञानी चिरकाल से इस गुत्थी    को सुलझाने में लगे … Continue reading

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जीने की राह(भाग-२)जीवन एक पहेली-लेखक -सत्यमित्र

क्या जीवन एक अनबूझ पहेली है?बहुत से लोग इस संसार के वृहत प्रसार को देख कर अचंभित एवं भ्रमित हो जाते है तथा जीवन के गूड रहस्यों को पूरी तरह नहीं समझ पाते/ उनकी स्तिथि बिलकुल वैसी ही होती है … Continue reading

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जीने की राह(भाग-१) -लेखक सत्यमित्र

मनुष्य देह अत्यंत दुर्लभ है तथा ईश्वर की  सर्वश्रेठ कृति है/  जीवन उसी परमपिता परमात्मा की ही देन  है/जीवन एक अनुपम अनुभव है तथा मनुष्य की सर्वप्रिय उपलब्धि / साधारण शब्दों में हमारी स्तिथि रेलगाड़ी के यात्रिओं जैसी है, गाड़ी खटाखट चली जा … Continue reading

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